ओमीय और अनओमीय चालक
ओमीय चालक (ohmic conductors) ओम के नियम का पालन करते हैं — उनमें धारा विभवांतर के समानुपाती होती है और V–I ग्राफ सीधी रेखा होता है (जैसे ताँबा)। अनओमीय चालक (non-ohmic conductors) ओम के नियम का पालन नहीं करते और उनका V–I ग्राफ सीधी रेखा नहीं होता (जैसे डायोड)।
ओम का नियम — कथन और सूत्र
ओम का नियम कहता है कि किसी चालक के सिरों के बीच विभवांतर उसमें बहने वाली धारा के समानुपाती होता है, बशर्ते चालक का ताप और भौतिक अवस्था अपरिवर्तित रहे।
- सूत्र: V = IR, जहाँ V विभवांतर (वोल्ट), I धारा (ऐम्पियर) और R प्रतिरोध (ओम) है।
- “ताप नियत रहे” शर्त को लिखना न भूलें — परीक्षा में इसी शर्त के अंक होते हैं, और यही शर्त बताती है कि फिलामेंट बल्ब अनओमीय क्यों है।
- प्रतिरोध का SI मात्रक ओम (Ω) है। 1 ओम वह प्रतिरोध है जिसमें 1 वोल्ट लगाने पर 1 ऐम्पियर धारा बहती है।
दोनों प्रकार के चालकों में अंतर
- ओमीय चालक: V–I ग्राफ मूल बिंदु से गुजरती सीधी रेखा होती है, और प्रतिरोध हर मान पर नियत रहता है।
- अनओमीय चालक: V–I ग्राफ वक्र होता है, अर्थात् प्रतिरोध धारा या विभवांतर के साथ बदलता है।
- ग्राफ की ढाल का अर्थ: V को y-अक्ष और I को x-अक्ष पर लेने पर रेखा की ढाल ही प्रतिरोध R होती है।
- ओमीय उदाहरण: ताँबे और निक्रोम के तार, स्थिर ताप पर अधिकांश धातुएँ।
- अनओमीय उदाहरण: अर्धचालक डायोड, LED, ट्रांज़िस्टर और फिलामेंट लैम्प।
- फिलामेंट लैम्प अनओमीय इसलिए है क्योंकि धारा बढ़ने पर फिलामेंट गर्म होता है और ताप बढ़ने से उसका प्रतिरोध बढ़ जाता है — अर्थात् ओम के नियम की शर्त ही टूट जाती है।
प्रतिरोध किन बातों पर निर्भर करता है
- चालक की लंबाई l के समानुपाती — तार जितना लंबा, प्रतिरोध उतना अधिक।
- अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल A के व्युत्क्रमानुपाती — तार जितना मोटा, प्रतिरोध उतना कम।
- पदार्थ की प्रकृति पर — इसे प्रतिरोधकता ρ से व्यक्त करते हैं।
- सूत्र: R = ρl/A. प्रतिरोधकता का मात्रक ओम-मीटर (Ω m) है।
- ताप पर — धातुओं का प्रतिरोध ताप बढ़ने पर बढ़ता है।
सामान्य गलतियाँ
- यह लिख देना कि ओम का नियम सभी चालकों पर लागू होता है। यह केवल ओमीय चालकों पर, नियत ताप पर लागू होता है।
- प्रतिरोधकता (ρ) और प्रतिरोध (R) को एक मान लेना। प्रतिरोधकता पदार्थ का गुण है और तार की लंबाई-मोटाई पर निर्भर नहीं करती; प्रतिरोध करता है।
- अनओमीय चालक को “जिसमें धारा नहीं बहती” समझ लेना। धारा बहती है — बस वह विभवांतर के समानुपाती नहीं होती।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
ओमीय और अनओमीय चालक में क्या अंतर है?
ओमीय चालक ओम के नियम का पालन करते हैं — धारा विभवांतर के समानुपाती होती है और V–I ग्राफ मूल बिंदु से गुजरती सीधी रेखा होता है (जैसे धातुएँ/ताँबा)। अनओमीय चालक ओम के नियम का पालन नहीं करते और उनका V–I ग्राफ वक्र (सीधी रेखा नहीं) होता है (जैसे डायोड, फिलामेंट बल्ब)।
ओमीय और अनओमीय चालक के उदाहरण दीजिए।
ओमीय: ताँबे का तार और स्थिर ताप पर अधिकांश धात्विक चालक। अनओमीय: अर्धचालक डायोड, LED, फिलामेंट लैम्प और ट्रांज़िस्टर।
दोनों का V–I ग्राफ कैसा होता है?
ओमीय चालक के लिए विभवांतर बनाम धारा का ग्राफ मूल बिंदु से गुजरती सीधी रेखा होता है। अनओमीय चालक के लिए यह ग्राफ वक्र या अरैखिक होता है।