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मानव पाचन तंत्र (Human Digestive System)

जीव विज्ञान · कक्षा 10 · मुफ़्त हिन्दी नोट्स (NCERT आधारित)

मानव पाचन तंत्र भोजन को छोटे-छोटे घुलनशील अणुओं में तोड़ता है ताकि शरीर उन्हें अवशोषित कर सके। इसमें मुँह, ग्रसिका, आमाशय, छोटी आँत और बड़ी आँत सम्मिलित हैं, जिनकी सहायता यकृत और अग्न्याशय जैसी ग्रंथियाँ करती हैं।

पाचन का मार्ग

भोजन आहारनाल से होकर गुजरता है और हर भाग में उसका कुछ न कुछ पाचन होता है।

यकृत और अग्न्याशय की भूमिका

छोटी आँत में यकृत से पित्त रस और अग्न्याशय से अग्न्याशयी रस आता है।

पित्त रस अम्लीय भोजन को क्षारीय बनाता है ताकि अग्न्याशयी एंजाइम काम कर सकें, और वसा की बड़ी बूँदों को छोटी बूँदों में तोड़ देता है — इसे इमल्सीकरण कहते हैं। अग्न्याशयी रस में ट्रिप्सिन प्रोटीन का और लाइपेज वसा का पाचन करता है।

अवशोषण और दीर्घरोम

छोटी आँत की भीतरी दीवार पर अंगुली जैसे असंख्य प्रवर्ध होते हैं जिन्हें दीर्घरोम (villi) कहते हैं। ये अवशोषण के लिए सतही क्षेत्रफल बहुत बढ़ा देते हैं।

दीर्घरोम में रक्त वाहिकाएँ होती हैं जो पचे हुए भोजन को शरीर की हर कोशिका तक पहुँचाती हैं, जहाँ उसका उपयोग ऊर्जा, वृद्धि और मरम्मत के लिए होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

पाचन तंत्र के मुख्य अंग कौन-से हैं?

मुख्य अंग हैं — मुँह, ग्रसिका (भोजन नली), आमाशय, छोटी आँत और बड़ी आँत। इनके साथ यकृत, अग्न्याशय और लार ग्रंथियाँ पाचक रस बनाती हैं।

भोजन का पाचन कहाँ से शुरू होता है?

पाचन मुँह से शुरू होता है, जहाँ लार में उपस्थित एंजाइम (टायलिन/एमाइलेज़) स्टार्च को शर्करा में तोड़ना शुरू करता है और दाँत भोजन को चबाते हैं।

पचे हुए भोजन का अवशोषण कहाँ होता है?

पचे हुए भोजन का अधिकांश अवशोषण छोटी आँत में होता है। इसकी भीतरी सतह पर उपस्थित दीर्घरोम (villi) अवशोषण के लिए सतह क्षेत्रफल बढ़ा देते हैं।

आमाशय में पाचन कैसे होता है?

आमाशय में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और पेप्सिन एंजाइम प्रोटीन का पाचन करते हैं। अम्ल भोजन के जीवाणुओं को मारता है और माध्यम को अम्लीय बनाता है।

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