संक्षारण और विकृतगंधिता — अर्थ, अंतर और रोकथाम
संक्षारण (corrosion) वह प्रक्रिया है जिसमें धातु हवा की नमी और ऑक्सीजन जैसी गैसों से क्रिया करके धीरे-धीरे नष्ट होती है — जैसे लोहे में जंग लगना। विकृतगंधिता (rancidity) वह प्रक्रिया है जिसमें भोजन में उपस्थित वसा और तेल हवा से ऑक्सीकृत होकर खराब हो जाते हैं और उनमें बुरी गंध व स्वाद आ जाता है। दोनों ही ऑक्सीकरण अभिक्रियाएँ हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संक्षारण और विकृतगंधिता क्या है?
संक्षारण धातु का हवा की नमी व ऑक्सीजन से क्रिया करके धीरे-धीरे नष्ट होना है (जैसे लोहे में जंग)। विकृतगंधिता भोजन के वसा और तेल का हवा से ऑक्सीकरण होकर खराब हो जाना है, जिससे बुरी गंध और स्वाद आता है।
संक्षारण और विकृतगंधिता में क्या अंतर है?
दोनों ऑक्सीकरण अभिक्रियाएँ हैं, परन्तु संक्षारण धातुओं में होता है (लोहे में जंग, चाँदी पर काली परत) जबकि विकृतगंधिता वसायुक्त व तैलीय भोजन में होती है। संक्षारण धातु की वस्तुओं को हानि पहुँचाता है और विकृतगंधिता भोजन को खराब करती है।
संक्षारण और विकृतगंधिता को कैसे रोका जा सकता है?
संक्षारण को पेंट करके, तेल या ग्रीस लगाकर, यशदलेपन (जिंक की परत/गैल्वनीकरण) या स्टेनलेस स्टील जैसी मिश्रधातु से रोका जाता है। विकृतगंधिता को प्रतिऑक्सीकारक (antioxidants) मिलाकर, पैकेट में नाइट्रोजन गैस भरकर, रेफ्रिजरेशन और वायुरोधी पैकिंग से रोका जाता है।
संक्षारण और विकृतगंधिता के उदाहरण दीजिए।
संक्षारण: लोहे के गेट में जंग, ताँबे पर हरी परत, चाँदी का काला पड़ना। विकृतगंधिता: पुराने मक्खन, खाना पकाने के तेल या खुले रखे तले हुए स्नैक्स की बुरी गंध।